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"Vah aisa kyo hai?" "वह ऐसा क्यों है ?"

आजकल या प्रारंभ से ही कहें मानव का एक विशेष स्वभाव रहा है कि वह दूसरे व्यक्ति को देखता है

उसके दोष देखता है और यह कहता है यह ऐसा क्यों है यह ऐसा क्यों नहीं करता है । यह इस बात का ध्यान क्यों नहीं रखता है जबकि हमें सदा यह ध्यान रखना चाहिए कि मैं ऐसा क्यों हूं मैं ऐसा क्यों नहीं करता हूं मैं ऐसा क्यों करता हूं आदि-आदि दूसरे पर आक्षेप करना । दूसरे को सुझाव देना दूसरे के सुधार की बातें करना ही हमारा स्वभाव बन गया है भारत में गाय क्यों कट रही है गो हत्या क्यों बंद नहीं हुई यह सब बातें ।

पड़ोसी में यदि देख ले तो आप कूड़ा यहां क्यों फेंकते हैं आप गंदगी क्यों मचाते हैं आप इतना लेट क्यों कूड़ा फेंकते है और तो और टेलीग्राम पर ही देख ले तो लोग अपने को कंट्रोल नहीं करते हुए यह कहते हैं कि यह इतनी पोस्ट क्यों लगाते हैं बार-बार पोस्ट लगाते हैं इतने बड़े वॉइस नोट लगाते हैं इतने सारे चित्र लगाते हैं अरे भाई लगाने दो अब तो स्पेस प्रॉब्लम भी नहीं है लेकिन यह सब स्वभाव म आ गया । मुझे एक दो लोगों ने कहा कि बहुत पोस्ट आ जाती है । अरे आ जाती है तो मत देखिए । जब आपको समय मिले खोलिए जो सामने पड़े देखिए और राधे राधे सेल्फ कंट्रोल नहीं । हम चाहते हैं दूसरे पर कंट्रोल करना अब एक सज्जन उस दिन मेरे से मिल । बोले आजकल इतने महंगे मंदिर क्यों बनाए जा रहे हैं वह बिल्कुल गलत है नहीं बनाए जाने चाहिए मेने कहा बिलकुल गलत है । जब आप मंदिर बनाने लगे तो आप नहीं बनाना । बोले । मैं तो कभी मन्दिर ही नही बनाऊंगा में बनाऊंगा नही । दूसरा क्यों बना रहा । कण्ट्रोल दूसरे पर । कोई नेताओं के बारे में कहता है । कोई सड़कों के बारे में कहता है यहां तक कि कोई भजन साधन पर भी आक्षेप करता है । कुल मिलाकर बात यह है दूसरा जो करता है उसे करने दें हम दूसरों की गलतियों से सीखें और जो हमें पसंद नहीं वह हम ना करें यदि इस बात को गांठ बांध लेंगे तो जीवन में आनंद होगा शांति होगी और खिन्नता से सदा के लिए बचे रहेंगे हम एक बात की गाँठ बाँध लें जो हमे पसंद नही । वो हम न करें जीवन में बस समस्त वैष्णव वृंद को दासाभास का प्रणाम ।

।। जय श्री राधे ।।

।। जय निताई ।। लेखक दासाभास डॉ गिरिराज

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